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Striyan: Parde se Prajatantra Tak Dushyant

Striyan: Parde se Prajatantra Tak

Dushyant

Published July 1st 2012
ISBN :
Hardcover
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 About the Book 

”यह किताब सतरी के विरोधाभासी जीवन में सामाजिक समसयाओं का समगरता से मूलयांकन करती है, पारंपरिक सरोतों के साथ-साथ समाचार पतरों एवं साहितय का परचुर मातरा में उपयोग किया गया है। इस पुसतक की अधययन परिधि को राजसथान के तीन रजवाडों जोधपुर,जैसलमेर एवं बीकानेरMore”यह किताब स्त्री के विरोधाभासी जीवन में सामाजिक समस्याओं का समग्रता से मूल्यांकन करती है, पारंपरिक स्रोतों के साथ-साथ समाचार पत्रों एवं साहित्य का प्रचुर मात्रा में उपयोग किया गया है। इस पुस्तक की अध्ययन परिधि को राजस्थान के तीन रजवाडों जोधपुर,जैसलमेर एवं बीकानेर के विशेष संदर्भ में बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध तक सीमित किया गया है। इस पूरी किताब की बडी खासियत यह है कि इसमें सायास रजवाड़ों, ठिकानों से इतर सामान्य महिलाओं की स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया गया है और वहीं पारंपरिक स्रोतों के साथ-साथ बीसवीं सदी के शुरू के आधे समय के साक्षी रचनात्मक साहित्य और समाचार पत्रों को बडे पैमाने पर इतिहास लेखन के स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया गया है। इस तरह जिस भौगोलिक क्षेत्र को यह पुस्तक संबोधित करती है, उसके लिए ऐसी किताब की जरूरत थी और उसे इस पुस्तक ने निसंदेह सफलतापूर्वक पूरा किया है। विचार और इतिहास की दुनिया में यह किताब एक गौरवपूर्ण इजाफा करती हुई प्रतीत होती है।अनेक विधाओं और माध्यमों के लिए समान अधिकार से लिखने वाले दुष्यंत की विषयानुरूप सहज, सम्मोहक और प्रांजल भाषा ने इस पुस्तक को बहुत रोचक और पठनीय बना दिया है। रेखांकित किया जाना जरूरी है कि ”स्त्रियां: पर्दे से प्रजातंत्र तक” हिंदी में मौलिक शोध की बानगी भी पेश करती है, विश्वास किया जा सकता है कि संजीदा और सघन वैचारिक बुनियाद पर गहन शोध से लिखित इस किताब को भारत में स्त्री इतिहास लेखन के लिहाज से महत्वपूर्ण गिना जाएगा।”(किताब के आवरण पर प्रकाशक की ओर से )you may order online : http://www.hindibook.com/index.php?p=...